कथा भागवत

कथा भागवत

भारतीय मनिषियों की हमेशा से ही यह धारणा रही है कि शिक्षा सामाजिक जीवन की आवश्यकता के अनुसार होनी चाहिए। शिक्षा का सामाजिक परिस्थितियों से सामंजस्य होना चाहिए। इसलिए शिक्षा पद्धतियों का भी देश, काल, परिस्थिति के अनुसार परिवर्तनशील होना आवश्यक है, साथ ही राष्ट्रीय संस्कृति, राष्ट्रीय मूल्यों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रति आदर भाव भी होना आवश्यक है। प्रचलित शिक्षा पद्धति के प्रति अध्यापकों, शिक्षाशास्त्रियों एवं दार्शनिक विचारकों के मन में उत्पन्न होने वाले असंतोष से ही हमें आधुनिक शिक्षा पद्धति से समन्वित गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली प्रारंभ करने की प्रेरणा से यह प्रयास किया है।