प्रवेश

वेद

‘विद् ज्ञाने’ के अनुसार वेद सम्पूर्ण ज्ञान का श्रोत है। इसमें सृष्टि विषयक ज्ञान सूक्तियों के रूप में वर्णित है। वेद की व्यापकता को देखते हुए सम्प्रति शुक्लयजुर्वेदमाध्यान्दिनीय शाखा के पाठ का अभ्यास करा रहे हैं। आगे हम वेद की पृथक-पृथक शाखाओं यथा उपनिषदादि का ज्ञान भी कराएँगे।

प्रवेश फार्म

प्रथमा

‘स्वरवर्णाद्युच्चारण प्रकारो यत्र शिक्ष्यते उपदिश्यते सा शिक्षा’। स्वर, (उदात्तानुदात्तस्वरित) वेद के उच्चारण की प्रक्रिया के बारे में सम्यक रूप से शिक्षित करते हैं। वेद की विशदता के अनुसारशिक्षा का क्षेत्र
भी बहुत व्यापक है। शुक्लयजुर्वेदमाध्यान्दिनीय शाखा के अनुरूप अभी शुक्लप्रातिशाख्य/वाजसनेयि प्रातिशाख्य एवं पाणिनीय शिक्षा/याज्ञवल्क्य शिक्षा का भी अध्ययन कराया जा रहा है।

प्रवेश फार्म

पूर्वमध्यमा

‘कल्पोवेदविहितानांकर्मणामानुपूर्व्येणकल्पनाशास्त्रम्’ वेद विहित कर्मो का क्रमिक स्वरुप व्यवस्थित करनेवाला शास्त्र ही ‘कल्प’ है। सनातन जीवन शैली में यज्ञ प्रमुख कृत्य होने के कारण व्यवहारोपयोगी कल्प सूत्रों में गृह्यसूत्र जो हमारे उपनयन, विवाह, श्राद्धादि कर्मों में प्रयुक्त होता है उनका अध्ययन भी होता है।

प्रवेश फार्म

उत्तरमध्यमा

शारीरिक विकास में सर्वप्रथम स्वस्थ एवं निरोग शरीर का स्थान है, जिस पर यम के पॉचों अंगों में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कराया जाता है। न मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किंचिद्।। शरीर के विकास के साथ बौद्धिक विकास का भी संयोजन है-पूर्णमदः पूर्णमिदम्0, अहमनुर्भवम्, पुरुषो वै प्रजायते। आदिवाक्य सिद्ध करते हैं। सामान्य व्यायाम के साथ पारम्परिक भारतीय खेल यथा दौड़, कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल वॉलीबॉल आदि का नियमित अभ्यास कराया जाता है।

प्रवेश फार्म

प्रवेश फार्म