विवाह

विवाह

‘कल्पोवेदविहितानांकर्मणामानुपूर्व्येणकल्पनाशास्त्रम्’ वेद विहित कर्मो का क्रमिक स्वरुप व्यवस्थित करनेवाला शास्त्र ही ‘कल्प’ है।
सनातन जीवन शैली में यज्ञ प्रमुख कृत्य होने के कारण व्यवहारोपयोगी कल्प सूत्रों में गृह्यसूत्र जो हमारे उपनयन, विवाह, श्राद्धादि कर्मों में प्रयुक्त होता है उनका अध्ययन भी होता है।