शारीरिक विकास में सर्वप्रथम स्वस्थ एवं निरोग शरीर का स्थान है, जिस पर यम के पॉचों अंगों में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कराया जाता है। न मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किंचिद्।। शरीर के विकास के साथ बौद्धिक विकास का भी संयोजन है-पूर्णमदः पूर्णमिदम्0, अहमनुर्भवम्, पुरुषो वै प्रजायते। आदिवाक्य सिद्ध करते हैं। सामान्य व्यायाम के साथ पारम्परिक भारतीय खेल यथा दौड़, कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल वॉलीबॉल आदि का नियमित अभ्यास कराया जाता है।

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