‘ज्योतिषानयनं चक्षुः’ भारतीय जीवन शैली में सभी कार्य, ग्रहों और नक्षत्रों की गति/स्थिति एवं ऋतुओं के अनुसार होता है। ग्रहों और नक्षत्रों की गति का ज्ञान ज्योतिष से ही होता है। ‘वेदाहि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ताः कालाग्निपूर्वाः विहिताश्च यज्ञाः। तस्मादिदं कालविधान-शास्त्र यो ज्योतिषं वेद से वेद यज्ञम्।।’
हमारे सभी दैनिक कृत्य ज्योतिष पर ही निर्भर होते है। हम यहां ज्योतिष के जातक, होरा एवं संहिता का ज्ञान करा रहे हैं। ब्रह्माण्डीय खगोल विज्ञान का भी प्रारम्भिक ज्ञान करा रहे हैं। आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुसार आङ्ग्ल भाषा, गणित, कला, चित्रकला, संगीत और नाट्यशास्त्र का अध्ययन
कराते हैं।