‘मुखं व्याकरणंस्मृतम्’ शरीर के पोषण के लिए मुख की अनिवार्यता है उसी प्रकार वेद रूपी पुरुष का मुख व्याकरण है। भाषा की स्थिति और संरक्षण के लिए व्याकरण की अपरिहार्य आवश्यकता है। भाष्यकार जी ने व्याकरण के मुख्य पॉच प्रयोजन बताये है। रक्षोहागमलध्वसन्देहाः प्रयोजनम् (महाभा0)। गुरुकुल में नव्यव्याकरण का अध्ययन प्रमुख से हो रहा है।